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Maha Shivratri Story- (महाशिवरात्रि)

Maha Shivratri Story

महाशिवरात्रि

महाशिवरात्रि हिन्दूओं का धार्मिक त्योहार है, जो भगवान शिव (महादेव) के सम्मान में प्रतिपर्ष मनाया जाता हैl वैसे तो शिवरात्रि हरेक महीने के 13वीं या 14वें दिन हिन्दू कैलेंडर के अनुसार हर लूनी-सौर माह (फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी) में मनाया जाता है, लेकिन साल में एक बार महाशिवरात्रि भी मनाया जाता हैl कश्मीर शैववाद में इस पर्व को हररत्रि या ध्वनि रूप से हैराथ या हेराथ कहा जाता हैl

हिन्दू धर्म में मनाये जाने वाला यह प्रमुख त्योहार पवित्र और स्मरण का प्रतीक हैl भगवान  शिव के याद में यह पर्व जीवन और दुनिया में आने वाले अँधेरे और अज्ञान को दूर करने के लिए मनाये जाते हैl उपवास, नैतिकता और सद्गुणों से भरा यह पर्व दूसरों के लिए ईमानदारी, गैर-चोट, दान, क्षमा के लिए प्रतीत होता हैl महाशिवरात्रि एक गहन घटना है जो अपने आत्मनिरीक्षण पर ध्यान केन्द्रित करने, उपवास, शिव पर ध्यान, आत्म अध्ययन, सामाजिक सद्दभाव और शिव मंदिरों में एक रात भर के लिए उल्लेखनीय हैl

इतिहास और मान्यताएं

पौराणिक कथाओं के आधार पर, महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव (महादेव) पहली बार प्रकट हुए थेl एक ऐसा शिवलिंग जिसका ना तो आदि था और ना ही अंत, जो शिव का प्रकट ज्योतिर्लिंग यानि अग्नि के शिवलिंग के रूप में थाl ऐसा कहा जाता है कि शिवलिंग का पता लगाने के लिए ब्रह्माजी हंस का रूप धारण कर शिवलिंग के सबसे उपरी भाग को देखने की कोशिश कर रहे थे, परन्तु वे सफल नहीं हो पाएं थेl इधर भगवान विष्णु भी वराह का रूप धारण कर शिवलिंग के आधार को खोज रहे थे, पर वे भी सफल नहीं हो पाएंl

पुराने मतों के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन ही शिवलिंग विभिन्न 64 जगहों पर प्रकट हुए थेl उनमें से केवल 12 जगह का नाम पता होने के कारण इन्हें हम 12 ज्योतिर्लिंग के नाम से जानते हैl इस दिन उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में लोग दीपस्तम्भ लगाते है, ताकि लोग शिवजी के अग्नि वाले अनंत लिंग का अनुभव कर आनंद ले सकेंl

एक ओर पुराने मतों के अनुसार, कहा जाता है कि इस दिन भगवान शिवजी की शादी उत्सव मनाते हैl महाशिवरात्रि को भगवान शिवजी के साथ आदि शक्ति की शादी हुई थीl इस रात भक्त लोग अपने आराध्य जागरण करते हैl इसी दिन भगवान शिव ने अपना वैराग्य जीवन को छोड़कर गृहस्थी जीवन में प्रवेश किया थाl

कहा जाता है कि समुद्र मंथन के समय अमर अमृत उत्पादन के साथ हलाहल नामक विष भी पैदा हुआ था, जिसमें ब्रह्माण्ड को नष्ट करने की क्षमता थाl इस विष को नष्ट करने  के लिए भगवान शिव ने अपने कंठ में रख लिया थाl विष इतना शक्तिशाली था कि भगवान शिव दर्द से पीड़ित हो उठे थे और उनका गला बहुत नीला हो गया था, जिसके कारण भगवान शिव नीलकंठ नाम से प्रसिद्ध हुएl चिकित्सकों ने उपचार के दौरान भगवान शिव को रात भर जागते रहने की सलाह दीl इसी कारण उस रात को शिव का आनंद लेने और पूरी रात जगाने के लिए देवताओं ने विभिन्न प्रकार के नृत्य और संगीत बजाने लगेl सुबह होते ही उन सबकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने आशीर्वाद दियाl इसी  समय से महाशिवरात्रि मनाया जाता हैl

पूजन विधि

इस दिन भक्तगण भगवान शिव का अभिषेक जल और दूध के अलावा अनेकों प्रकार से करते हैl सुबह होते ही भगवान शिव के दरबार में भक्तों, जवानों, बूढों और औरतों का काफी भीड़ लग जाता हैl सुर्योदय से समय भक्तगण पवित्र स्थानों जैसे- गंगा या किसी अन्य पवित्र जल स्रोत में स्नान करते हैl यह शुद्धि के अनुष्ठान हैं, जो सभी हिन्दुओं के त्योहार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैl स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैl भक्तगण शिवलिंग को स्नान कराने के लिए मंदिर के अन्दर पानी या दूध के बर्तन ले जाते हैl पुरुषों और औरतों दोनों सूर्य, विष्णु और शिव की प्रार्थना करते है और मंदिर में घंटी के साथ ‘भगवान शंकर जी की जय’ की ध्वनि भी गूंजती हैl भक्तगण शिवलिंग की तीन या सात बार परिक्रमा करते है और पूजा करने के दौरान शिवलिंग पर जल या दूध डालकर प्रार्थना करते हैl

इसके अलावे पूजा के दौरान  शिवलिंग पर पानी, दूध और शहद के साथ बेर या बेल के पत्ते चढ़ाते है, जो  आत्म शुद्धि का प्रतिनिधित्व करते हैl स्नान के बाद शिवलिंग पर सिंदूर का पेस्ट लगाना पूण्य का प्रतिनिधित्व माना जाता हैl भक्तगण फल भी चढ़ाते है, जो दीर्घायु और इच्छाओं की संतुष्टि प्रदान करते हैl जलती धुप, धन, उपज यानि अनाज भी चढ़ाते हैl दीपक जलाते है, जो ज्ञान की प्राप्ति के लिए अनुकूल हैl सांसारिक सुखों के साथ संतोष अंकन के लिए पान का पत्ता भी चढ़ाया जाता हैl इन सब के अलावे धतुरा, अबीर, गुलाल, उम्बी आदि भी अर्पित किया जाता हैl भगवान शिव को भांग बहुत पसंद है, इसलिए उन्हें भांग भी चढ़ाते हैl

देशों में शिवरात्रि

भारत के तमिलनाडु राज्य में शिवरात्रि बड़ी धूमधाम से मनाई जाती हैl तिरुवन्नामलाई जिले में अन्नामलाईयार मंदिर स्थित है, जहाँ इस दिन पूजा की विशेष प्रक्रिया ‘गिरिंवलम’ या गिरि प्रदक्षिणा होता हैl इस प्रक्रिया में पहाड़ी की चोटी पर भगवान शिव के मंदिर के चारों ओर नंगे पैर 14 किलोमीटर तक चलना पड़ता हैl ‘कार्तिगई दीपम’ नाम का एक विशाल तेल का दीपक और कपूर सूर्यास्त में पहाड़ी पर जलाया जाता हैl वाराणसी और सोमनाथ में विशेष रूप से महाशिवरात्रि मनाते हुए, मेलों और आयोजनों के लिए साइटों के रूप में भी काम किया जाता हैl

महाशिवरात्रि के अवसर पर आंध्रप्रदेश और तेलंगाना  में रेलवे कोडूरु के पास कंबालापल्ली, गुंडलकम्मा कोना के पास मलय्या] गुट्टा में आयोजित होता हैl

कश्मीर शैववाद में कश्मीरी हिन्दुओं द्वारा महाशिवरात्रि मनाई जाती हैl कश्मीरी में इसे “हेराथ” कहा जाता हैl संस्कृत शब्द में शिव का दूसरा नाम ‘हररात्रि’ यानि हारा की रात से जुड़े हैl

मध्य भारत में बड़ी संख्या में शैला अनुयायी हैl महाकालेश्वर मंदिर उज्जैन, शिव के सबसे पवित्र मंदिरों में से एक है, जहाँ महाशिवरात्रि के दिन पूजा करने के लिए भक्तों की एक बड़ी सभा जमा होती हैl

पंजाब के विभिन्न शहरों में हिन्दू संगठनों द्वारा शोभा यात्राएं आयोजित होती है, जो  पंजाबी हिन्दुओं का भव्य त्योहार हैl

गुजरात में, जूनागढ़ के पास भवनाथ में महाशिवरात्रि का मेला आयोजित की जाती हैl यहाँ मृगी कुंड में स्नान करना पवित्र माना जाता हैl मिथक के अनुसार, भगवान शिव स्वयं मृगी कुंड में स्नान करने आते हैl

पश्चिम बंगाल में, अविवाहित लड़कियों द्वारा श्रध्दापूर्वक महाशिवरात्रि मनाया जाता है, जो अक्सर में उपयुक्त पति की तलाश करती हैl

नेपाल में महाशिवरात्रि के दिन राष्ट्रीय अवकाश होता है और बड़े धूमधाम से मनाया जाता हैl पुरे देश में पशुपतिनाथ मंदिर ही एक ऐसा मंदिर है, जो  विशेष रूप से हैl भक्तगण पास में ही प्रसिद्ध शिव शक्ति पीठम् के दर्शन करते हैl पुरे देश में पवित्र अनुष्ठान किए जाते हैl रातभर विभिन्न शास्त्रीय संगीत और नृत्य के रूपों में कलाकार प्रदर्शन करते हैl महाशिवरात्रि के अवसर पर विवाहित महिलाएँ अपने पति के सलामती के लिए प्रार्थना करती है और अविवाहित महिलाएँ शिव जैसे ही आदर्श पति को पाने के लिए  प्रार्थना करती हैl यहाँ भगवान शिव को आदि गुरु के रुप में पूजा जाता है, जिनसे दिव्य ज्ञान उत्पन्न होता हैl

पाकिस्तान में महाशिवरात्रि के दौरान हिन्दू, शिव मंदिर जाते हैl उमरकोट शिव मंदिर में तीन दिवसीय महत्वपूर्ण शिवरात्रि उत्सव होता हैl यह देश के सबसे बड़े धार्मिक पर्व में से एक हैl इसमें लगभग ढाई लाख लोग शामिल होते हैl इस पर्व में जितना भी खर्च होता है, उसका भरपाई पाकिस्तान हिन्दू पंचायत द्वारा दिया गया थाl शिवरात्रि समारोह चुरियो जबल दुर्गा मांदरी में भी होता है, जिसमें दो लाख तीर्थयात्री शामिल होते हैl कराची के श्री रत्नेश्वर महादेव मंदिर में महाशिवरात्रि मनाई जाती है, जिसमें लगभग पच्चीस हजार लोग शामिल होते हैl रात को कराची में हिन्दू उपवास करते है, फिर मंदिर जाते हैl बाद में, चंवर गोथ के भक्त पवित्र गंगा से पानी लेकर शिव मूर्ति को स्नान कराने के लिए मंदिर जाते हैl पांच बजे सुबह तक पूजा होती हैl इसके बाद भक्त महिलाओं के साथ नंगे पांव चलते है, जिसके साथ पूजा की थाली होती है, जिसमें फुल, अगरबती, चावल, नारियल और दीया होते हैl इसके बाद वे सब अपना व्रत तोड़ने के लिए स्वतंत्र होते हैl

दक्षिण एशिया से बाहर भारतीय राज्यों के हिन्दू डायस्पोरा के बीच उत्तर प्रदेश और बिहार में महाशिवरात्रि मनाते हैl इंडोकैरिबियन समुदायों में, हजारों हिन्दू देश भर में चार सौ से अधिक मन्दिर में रात बिताते है और भगवान शिव को विशेष झाल चढ़ाते हैl मॉरीशस में हिन्दू तीर्थ यात्रा पर जाते हैl

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