रेल का इतिहास पुरी दुनिया में चीन अपना जाल फेला चुका हैl

रेल का इतिहास पुरी दुनिया में चीन अपना जाल फेला चुका हैl रेल नेटवर्क

स्पेन:- दिसंबर 2014 में चीन की 82 बोगियों वाली मालगाड़ी स्पेन की राजधानी मैड्रिड पहुंचीl 18 नंबवर को यिवु शहर से चली यह मालगाड़ी 13,000 किलोमीटर लंबा सफर कर 9 दिसंबर को मैड्रिड पहुंचीl ट्रेन, रूस, जर्मनी और फ्रांस समेत 8 देशों को पार करते हुए गईl आज चीन और यूरोप के बीच नियमित रूप से मालगाड़ियां आती जाती हैंl

तंजानिया:- जाम्बिया रेल नेटवर्कl ताजारा कहा जाने वाले इस प्रोजेक्ट के जरिये 1976 में चीन ने पूर्वी अफ्रीका को मध्य और दक्षिणी अफ्रीका से जोड़ाl 1,860 किलोमीटर लंबे नेटवर्क को खड़ा करने के लिए चीन ने 50,000 कामगारों की मदद लीl पूरी योजना चीन की ही आर्थिक मदद से चलीl



तिब्बत:- एक जुलाई 2006 के दिन तिब्बत की राजधानी ल्हासा तक ट्रेन पहुंचाकर विश्व को हैरान कर दियाl ट्रेन में खुद तत्कालीन चीनी राष्ट्रपति हू जिंताओ भी सवार थेl समुद्र से 5,027 मीटर की ऊंचाई पर बना यह दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे नेटवर्क हैl

जर्मनी:- अक्टूबर 2013 में चीन की मालगाड़ी, ट्रांस साइबेरियन रूट का इस्तेमाल करते हुए 9,820 किलोमीटर का सफर कर जर्मनी के पोर्ट शहर हैम्बर्ग पहुंचीl उस वक्त यह रिकॉर्ड था. इस तरह चीन ने अपने हार्बिन शहर को जर्मनी के कारोबारी शहर हैम्बर्ग से जोड़ाl

तुर्की:- जनवरी 2014 में चीन ने तुर्की में हाई स्पीड रेलवे नेटवर्क का काम पूरा कर दिया. अब इंस्ताबुल और अंकारा के बीच हाई स्पीड ट्रेनें चलती हैंl

म्यामांर:- 2015 में चीन ने म्यामांर की राजधानी यांगोन और कुनमिंग शहर को रेल सेवा से जोड़ने का काम शुरू कियाl प्रोजेक्ट 2020 में पूरा होगा. 1,920 किलोमीटर लंबे इस रास्ते पर 140 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से ट्रेनें चलेंगीl

अंगोला:- 2015 में चीन ने अंगोला में 1,344 किलोमीटर का रेल नेटवर्क तैयार कर चालू कर दियाl चाइना रेल कंस्ट्रक्शन कारपोरेशन द्वारा बनाया गया यह रेल ढांचा देश का सबसे अहम आर्थिक गलियारा हैl रेल का इतिहास

तेहरान:- 15 फरवरी 2016 को 32 बोगियों वाली चीनी मालगाड़ी ईरान की राजधानी तेहरान पहुंचीl मालगाड़ी झेंगजियांग प्रांत से कजाखस्तान और तुर्कमेनिस्तान होते हुए ईरान पहुंचीl रेल का इतिहास



फिर से सिल्क रूट का सफर:- तेहरान तक ट्रेन पहुंचाकर चीन ने सैकड़ों साल पुराने सिल्क रूट के पैदल रास्ते को फिर से जीवित कर दियाl रेल का इतिहास

नाइजीरिया:- जुलाई 2016 में चीन की मदद से बने रेल नेटवर्क पर नाइजीरिया में पहली ट्रेन चलीl ट्रेन में खुद नाइजीरिया के राष्ट्रपति सवार थेl 186 किलोमीटर लंबा ट्रैक राजधानी अबूजा को काडुना शहर से जोड़ता हैl ट्रैक की उच्चतम रफ्तार 150 किलोमीटर प्रतिघंटा हैl रेल का इतिहास

अफगानिस्तान:- सितंबर 2016 में चीन ने अफगानिस्तान को जोड़ने वाले रेलवे ट्रैक का काम खत्म कर वहां भी मालगाड़ी पहुंचा दीl रेल का इतिहास

अदिस अबाबा-जिबूती रेल नेटवर्क:- अफ्रीका के पांच देशों में भी चीन का रेल नेटवर्क हैl अक्टूबर 2016 में अदिस अबाबा-जिबूती में चीन ने 120 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार वाला 752.7 किलोमीटर लंबा ट्रैक बना दियाl चीन इथियोपिया की राजधानी अदिस अबाबा में मेट्रो रेल नेटवर्क शुरू भी कर चुका हैl

पाकिस्तान:- दिसंबर 2016 में चीन ने पाकिस्तान के सबसे बड़े शहर कराची तक मालगाड़ी पहुंचा दीl मालगाड़ी पर 500 टन माल लदा थाl ट्रेन के जरिये कुनमिंग से कराची तक परिवहन का खर्चा 50 फीसदी घट जाएगाl ट्रेन नियमित रूप से चलेगीl रेल का इतिहास

मोम्बासा-नैरोबी ट्रैक:- 2017 के अंत तक चीन केन्या में 480 किलोमीटर लंबा रेल नेटवर्क पूरा कर देगाl इसका काम 2014 में शुरू हुआ थाl 2,935 किलोमीटर लंबा ट्रैक राजधानी नैरोबी को मोम्बासा से जो़ड़ेगाl इस ट्रैक पर यात्री ट्रेनें 120 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से चल सकेंगीl देर सबेर इस ट्रैक के जरिये यूगांडा, रवांडा, बुरुंडी और साउथ सूडान को जोड़ा जाएगाl

नेपाल:- चीन अब नेपाल तक रेल नेटवर्क का विस्तार करना चाहता हैl नेपाल और चीन के बीच इस मसले पर बातचीत भी हो रही हैl चीन चाहता है कि वह काठमांडू होते हुए पोखरा और लुम्बिनी तक रेल पहुंचायेl चीन नेपाल को तिब्बत से भी जोड़ना चाहता हैl

भारत:- चीन चाहता था कि तिब्बत व नेपाल को जोड़ने वाले रेलवे ट्रैक से भारत भी जुड़ेl ऐसा हुआ तो भारत का रेल नेटवर्क भी ग्लोबल नेटवर्क से जुड़ जाएगाl बीजिंग की कोशिश है कि तिब्बत को भारत, चीन और नेपाल के बीच व्यापारिक केंद्र की तरह इस्तेमाल किया जाएl हालांकि भारत ने अभी तक इस नेटवर्क के बारे में कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया हैl

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